जिस साले के लिए साला जेल हो जाए।
ये साला मर्यादित साला है।
इस साला से सुप्रीम कोर्ट का मान बढ़ता है।
इस साला के तेज में गृहमंत्री की क्रोनोलाजी से पर्दा उठता है।
ये वाला साला नेहरू जी के समय वाले साला से अलग है।
बल्लभ भाई पटेल जी गृहमंत्री थे लेकिन उन्होंने साला कब बोला इसकी खबर प्रथम सेवक को नहीं.. लेकिन प्रधान सेवक को साला जरूर होगा।
इस साला से संसद की गरिमा बनी रहती है।
इस साला से अध्यक्ष जी को क्रोध नहीं आता। आंखें नहीं जलतीं।
सौम्य सजीली मुस्कान बनी रहती है।
इस साला में भड़वा और कटुआ जैसा अपमान नहीं है।
यह साला शुद्धता की गारंटी है। कुंदन सा खरा।
ये साला गाली वाला साला नहीं है।
ये साला रिश्ता वाला साला है।
इस साला से लंबा निभाया जा सकता है।
इस साला का कोई जात धर्म नहीं।
ये साला समदर्शी है।
क्योंकि ये साला तुम्हारा वाला साला नहीं है।
जो पूरी जिंदगी खिर्र-खिर्र करता रहे।
अपना वाला साला गाली होता है।
ये वाला साला में रिश्तों से संलग्न अंग शामिल नहीं है। कुछ लोगों को साला इतना छूट तो होना हीं चाहिए कि वो साला बोल सकें। कम से कम सड़क पर ना सही लेकिन साला संसद में बोल सकें।
अब साला देश का गृहमंत्री संसद में भी साला नहीं बोल सकता तो काहे का लोकतंत्र? और कौने बात की आजादी?
अब साला आदमी साला भी ना बोलने पाए तो साला काहे की जिंदगी?
फिर साला ऐसी जिंदगी किस काम की?
बोल तो वो चु से चुतिया भी सकते थे। या उससे भी अलग कुछ और गहरा और घिनौना लेकिन साला चु से चुनाव आयोग बोले। नहीं तो साला च से चुतड़ पर चार लात भी मार सकते थे।
जैसे लिखा तो बहुत कुछ जा सकता है लेकिन लिखा वहीं जाए तो बोला गया है। ये नहीं कि साला जो खुद से मनमानी पके जा रहा है।
1 comment:
Ye wala home minister wo wala home minister ni hai 😃😃😃
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