तुम परेशान हुए बैठे हो कि यह निरंकुश और अमानवीय सरकार है। जहां व्यक्ति के मौलिकताओं का पतन हो रहा है।
अरे! अब बात भारत की नहीं रही। अब बात विश्वगुरु की हो गई है। जिस देश की
वित्त मंत्री महंगाई के सवाल पर यह कहे कि मैं लहसुन प्याज नहीं खाती। परिवहन मंत्री कहे मैं पेट्रोल वाली गाड़ी में नहीं चलाता। पर्यावरण मंत्री कह बैठे किसी रोज कि मैं आक्सीजन नहीं लेता। वहां तुम शिक्षामंत्री के पिछे खाना छोड़कर पड़े हुए हो। किताब की इतनी बड़ी-बड़ी बातें और मानवीय मूल्य याद हैं। अपनी जीजिविषा का स्मरण है। अपने शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए पगलाए हुए हो। भविष्य की कामना लिए चायवाले को उंगली दिखा रहे हो। लेकिन यह भूल गए कि विश्वगुरु देश के प्रधान सेवक
शिरोमणि नरेंद्र दामोदर दास मोदी ने कहा था कि किसी को भूख से नहीं मरने दूंगा। अब तुम कहो कि यह भी तो कहा था का ना खाऊंगा ना खाने दूंगा? हां, तो भैया नवरात्रि में वो नहीं खाए और २० दिन से तुम। और वो भी अपनी मर्जी से। उन्होंने तो तुम्हें रोका भी नहीं। कोई गरीब भूखा नहीं मरेगा.. और आप तो सफल व्यक्ति हो भैया, इसी क्रम में उन्होंने देश में मुफ्त राशन भी बाटे।
80 करोड़ गरीब जनता का पेट भरा। फिर तुम्हें उठाकर खाना ठूसवाने ले गए तो तुम्हारे पेट दर्द कर रहे हैं? तुम्हीं तो भगत सिंह की तस्वीरें लहरा रहे थे प्रदर्शन के दौरान। उनकी भी भूख-हड़ताल जबरजस्ती तोड़ी गई थी। उन्हें भारत देश में फांसी दिया गया था।
तुम फांसी तक रूके रहो।
तुम फांसी तक खाते रहो।
तुम फांसी तक चुप रहो।
तुमने स्वयं को गांधी का अनुयाई बताया है.. सत्याग्रह का पालन किया है।
तुम गोड़से के आने तक खाते पीते रहो।
भजन गा सको तो वो भी गाओ.. शायद वो जल्दी पहुंचे।
तुम्हें इस अन्न के बाद गोली खानी है।
तुम्हें फांसी चढ़ना है।
तुम अभी से बौखला गए?
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